प्रधानमंत्री और होने वाले 'प्रधानमंत्री'

[dc]न[/dc]रेंद्र मोदी के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी और उनके समर्थकों का लोहा इतना गरम है कि वे गुजरात के फायरब्रांड मुख्यमंत्री को जल्द से जल्द लाल किले पर चढ़ाने के लिए बेताब हैं। इसमें कोई बुरी बात भी नहीं है। पर यहां मुद्दा अलग है। पंद्रह अगस्त देश के लिए एक राष्ट्रीय पर्व है। […]

जनता के प्रतिपक्ष में पक्ष-विपक्ष

[dc]इ[/dc]स सवाल का जवाब ढूंढ़ने का शायद समय आ पहुंचा है कि एक राष्ट्र के रूप में प्रगति के तमाम दावों के बावजूद आम नागरिक उदास क्यों नजर आता जा रहा है? वह अपनी किस परेशानी को लेकर लगातार चिंतित है? वह अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर परेशान है या फिर उसे यह डर लग […]

‘संस्कार’ क्षेत्रीय, आकांक्षा अखिल भारतीय

[dc]उ[/dc]त्तर प्रदेश की आईएएस अफसर दुर्गा शक्ति नागपाल के निलंबन से उपजे विवाद में समाजवादी पार्टी के महासचिव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव के चचेरे भाई रामगोपाल यादव ने केंद्र सरकार को जो चुनौती दी है, उस पर व्यापक संदर्भों में चर्चा किए जाने की जरूरत है। रामगोपाल यादव के बयान को केवल आवेश […]

दुर्गा की शक्ति ने उतारी नकाबें

[dc]दु[/dc]र्गा शक्ति नागपाल का अगर निलंबन नहीं होता तो उस उत्तर प्रदेश की राजनीति का वह गंदा चेहरा प्रकट नहीं हुआ होता जो देश की राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्रियों की कुर्सी का कार्यकाल निर्धारित करता है। दुर्गा शक्ति के एक “प्रशासनिक” बलिदान से उत्तर प्रदेश की अस्सी लोकसभा सीटों के लिए मचने वाले घमासान के […]

भरे पेट पांच और बारह की राष्ट्रीय बहस

[dc]कां[/dc]ग्रेस ने अगर अपने बड़बोले नेताओं के ‘जुबानी डायरिया’ का वक्त रहते डॉक्टरी इलाज नहीं किया तो चुनावों के बाद इस देशव्यापी पार्टी की एक बड़ी जमात को पांच सितारा आरामगाहों से बेदखल होकर पांच और बारह रुपए के भोजन के उन ठिकानों की तलाश करना पड़ेगी जिनके कि पतों को वे आज हवा में […]

‘देसी’ नेता, ‘बिदेसी’ पत्रकार

[dc]गु[/dc]जरात के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पद के लिए भारतीय जनता पार्टी के सबसे ज्यादा संभावित उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के प्रति सहानुभूति व्यक्त की जा सकती है। गुजरात दंगों के कोई ग्यारह साल बाद उन्होंने पहली बार मुंह खोलने का साहस दिखाया और ‘कुत्ता-फजीहत’ में फंस गए। गोरी चमड़ी वाले पत्रकारों के सामने संवेदनशील देशी मुद्दों […]

कौन हैं ये बिखरे हुए लोग?

कौन हैं ये तमाम लोग जो धागे से टूटकर गिरी हुई पन्नियों की तरह यूं जमीन और नुकीली चट्टानों पर इस तरह से बिखरे पड़े हैं? कहां से आए हैं ये लोग जो कि लाए नहीं गए हैं इस तरह बेसुध लेटे हुए एकटक कहीं देख रहे हैं, दूर शून्य में जैसे कि कुछ ढूंढ़ […]

हे पिता, केदारनाथ!

होने लगा है वक्त अब हमारे घर लौटने का प्रभु दीजिए इजाजत हमें, हे केदारनाथ! बढ़ रहा है अंधेरा आंखों के आसपास, लगने लगा है डर अपनी ही उपस्थिति से हमें। तुम तो हो पिता, शिव हो तुम अंतरयामी, जानते हो पीड़ाएं सबकी। करना है ढेर सारे काम हमें लौटकर गांव अपने। आने वाले हैं […]

सारे ही "महत्वाकांक्षी" जल्दबाजी में हैं

[dc]नी[/dc]तीश कुमार के फैसले के साथ ही नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को चुनौती दे सकने वाला अंतिम विरोध भी अब समाप्त हो गया है। एनडीए अभी दस्तावेजी रूप में बना हुआ है। कहने को केवल एक घटक दल और उसका संयोजक ही उससे बाहर निकला है। भारतीय जनता पार्टी में अपेक्षाकृत निर्बल जनाधार वाले मोदी-विरोधियों […]

भाजपा को 'पितृ पुरुष' चाहिए आडवाणी नहीं

[dc]गो[/dc]वा में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक खत्म होने की अगली सुबह ही भारतीय जनता पार्टी के ‘पितृ पुरुष’ पूरी तरह से स्वस्थ हो गए और समूची पार्टी एक लंबे समय के लिए बीमार पड़ गई। आडवाणी की सेहत खराबी एक ‘बहाना’ था। भाजपा की सेहत का खराब होना एक हकीकत है। आडवाणी अगर ‘कू्ररता’ पर […]