सरकार की शुरुआत, कसाब का अंत

[dc]स[/dc]रकार चाहती तो कसाब को फांसी पर चढ़ाने का फैसला काफी पहले भी कर सकती थी। पर इसके लिए जिस साहस की जरूरत थी वह शायद उसके पास नहीं था। मुंबई के नागरिकों के धैर्य और उनकी बहादुरी पर सरकार की कायरता भारी पड़ रही थी। सरकारों का गणित आम जनता की संवेदनाओं और अपेक्षाओं […]

श्रद्धांजलि: साहस की राजनीति के शेर का अवसान

[dc]बा[/dc]ल ठाकरे अपनी अनुपस्थिति से पैदा होने वाली रिक्तता और उसके प्रभाव के प्रति पूरी तरह से वाकिफ थे। शायद इसी कारण उन्होंने ‘मातोश्री”, अपने लाखों शिव सैनिकों, मुंबई और महाराष्ट्र की जनता और उद्धव- राज ठाकरे सहित शिवसेना के उत्तराधिकारियों को इस कठिन क्षण का सामना करने के लिए तैयार होने का पर्याप्त समय […]

जब तक है जान इस ट्रायल में

[dc]भा[/dc]रतीय जनता पार्टी ने अपने विवादास्पद अध्यक्ष नितिन गडकरी को एक राष्ट्रीय मुद्दे में बदलकर रख दिया है। इसके लिए न तो भाजपा और न ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने देश के नागरिकों से कभी कोई राय ली। संघ और भाजपा के नेता गडकरी को फुटबॉल बनाकर “रखो-हटाओ” का खेल खेल रहे हैं और देश […]

साजिद, सयाजी और शहर

[dc]सा[/dc]जिद धनानी ने मौका ही नहीं दिया कि कोई उन्हें कभी इत्मिनान से बता सके कि पिछले कोई बीस सालों में इंदौर को उसकी मूल आत्मा के साथ ही एक आधुनिक शहर में तब्दील करने में उनकी कितनी अहम भूमिका रही है। साजिद वास्तव में एक लगातार बोलते रहने वाली जीवंत होटल के एक चुपचाप […]

इस जीत के मायने अलग

[dc]रा[/dc]जनीतिक विश्लेषकों के अनुमानों को झुठलाते हुए बराक ओबामा एक बार फिर दुनिया के सबसे सशक्त राष्ट्र अमेरिका के राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं। चुनाव परिणामों से यही साबित हुआ कि लड़ाई न तो बराबरी की थी और न ही टक्कर कांटे की। ओबामा और रोमनी के बीच उम्र का जितना फासला है वही दोनों […]

अब बराबरी की हो गई लड़ाई

[dc]भा[/dc]रतीय जनता पार्टी के नेताओं ने नितिन गडकरी को उनके पद पर बनाए रखने और अपने आपको पार्टी-अध्यक्ष के साथ खड़े रखने का फैसला किया है। सिद्ध पाया गया कि पार्टी अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मर्जी से होती है और बनाए रखने का फैसला गुरुमूर्ति की समझाइश से होता है। […]

हमला विपक्ष नहीं जनता पर!

[dc]दि[/dc]ल्ली के रामलीला मैदान में रविवार को हुई कांग्रेस की बहुचर्चित और बहुप्रचारित रैली के देश के लिए क्या-क्या संकेत हैं? पहला तो यह कि कांग्रेस पार्टी अपनी बढ़ती उम्र और ढलती लोकप्रियता के चलते इस समय घोर निराशा के दौर में है। रैली उसकी चुनाव पूर्व की घोषणा है कि वह सत्ता को आसानी […]

चुनाव तक के लिए राहत का इंतजाम

[dc]डॉ.[/dc] मनमोहन सिंह आज अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन करने जा रहे हैं। सारे देश और समूचे मीडिया की नजरें अब कुछ वक्त के लिए राबर्ट वाड्रा, नितिन गडकरी और कोयला खदानों से हटकर उन ‘युवा” चेहरों की ओर टिक जाएगी, जो अस्सी वर्षीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कांग्रेस को अगले चुनावों तक ले जाने वाले […]

भ्रष्टाचार का सीधा प्रसारण

[dc]यू[/dc]पीए सरकार अब भाजपा अध्यक्ष से जुड़ी कंपनियों पर लगे आरोपों की जांच करवाने वाली है। सत्ता में होने का इतना सुख तो उसे मिलना ही चाहिए कि वह जांच के लिए राजनीतिक शिकारों का चुनाव मर्जी और सुविधा के अनुसार कर सके। लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में चुनावों से पहले प्रतिद्वंद्वियों से इसी तरह निपटा जाता […]

कोई तो झूठ बोल रहा है!

[dc]रा[/dc]जनीति भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के साम्राज्य की एक गंदी गटर में तब्दील होती जा रही है और ‘अतुलनीय भारत” के नागरिकों का इस्तेमाल उसमें पलने वाले कीड़ों के रूप में किया जा रहा है। फिल्म के नायक/खलनायक जैसे रातों-रात बदल दिए गए हैं। जो लोग एक्स्ट्रा कलाकारों के रूप में और मंच के कोनों में […]