चापलूसी के चाचा चौधरी और कांग्रेस की अमरकथा

राजीव गांधी राजनीति में पैर भी नहीं रखना चाहते थे। वे एक नितांत ही प्रायवेट और अगल किस्म के इंसान थे। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व अद्भुत और आकर्षक था। पर भाई संजय गांधी की असामयिक मौत के कारण श्रीमती इंदिरा गांधी जब अकेली पड़ गईं तो राजीव ने न सिर्फ राजनीति में प्रवेश किया उसके साथ […]

क्यों नहीं आता गुस्सा और फूटते हैं आंसू

श्याम बेनेगल की स्मरणीय कृति ‘अंकुर’ के अंतिम दृश्य में समाज के सबसे शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला बच्च शोषक जमींदार की हवेली पर पत्थर उछालता है और इसी के साथ फिल्म का अंत हो जाता है। याददाश्त बहुत खराब हो तब भी अंकुर को फूटे कोई तीस-पैंतीस साल से ज्यादा का वक्त हो […]

बाजार ही तय करेगा क्रिकेट और खिलाड़ियों का भविष्य

देश में इन दिनों बहस चल रही है कि विश्व कप में हारकर लौटी टीम के साथ किस तरह का सुलूक किया जाए। इस सवाल को लेकर खुला मतदान चल रहा है कि राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाए रखा जाए या नहीं, ग्रेग चैपल की कोच के रूप में सेवाएं हमें […]