आडवाणी का रथ से उतरना अभी बाकी है!

१८ दिसंबर २००९ आगे आने वाले कई वर्षों और पीढिय़ों के लिए भारतीय जनता पार्टी के भविष्य की दिशा शुक्रवार को तय कर दी गई। कई दशकों के बाद ऐसा होगा कि पार्टी किसी एक व्यक्ति के घर या चेहरे पर नहीं प्राप्त होगी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में ऐसा निश्चित ही नहीं कहा […]

नस्ली हमलों का असली इलाज यह नहीं है

मेलबोर्न और सिडनी में भारतीय छात्रों पर हुए हमलों की घटनाओं को लेकर भारतीय मीडिया में जिस तरह का तूफान मचा हुआ है अगर हालात उतने ही संगीन हैं तो वाकई चिंता की बात है। पर इस तरह की घटनाओं को लेकर पिछले तमाम अनुभवों का सार यही है कि एक समय के बाद सबकुछ […]

आडवाणी जी चाहें तो पुनर्विचार कर सकते हैं

१७ मई 2009 आडवाणी जी चाहें तो पुनर्विचार कर सकते हैं – श्रवण गर्ग लोकसभा के चुनावों में पड़े मतों की गिनती में भारतीय जनता पार्टी के खराब प्रदर्शन से दुखी होकर श्री लालकृष्ण आडवाणी ने विपक्ष के नेता पद से मुक्त होने का न सिर्फ इरादा जताया है, वे अपने फैसले पर कायम भी […]

इस जीत के पीछे भी कोई वजह होनी चाहिए

१६ मई २००९ यूपीए को मिले जन समर्थन से वे लोग भी हतप्रभ हैं, जिन्होंने वोट तो कांग्रेस को दिया था, पर प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार की घोषणा के लिए प्रकाश करात का मुंह ताक रहे थे या फिर लालकृष्ण आडवाणी की ओर देख रहे थे। वर्ष 1991 में राजीव गांधी की नृशंस हत्या […]

'हिंदू टैरर': चुप्पी का मतलब स्वीकृति नहीं है

इस्लामी आतंकवाद या ईसाई विस्तारवाद का मुकाबला करने के लिए हिंदू राष्ट्रवाद के नाम पर कतिपय संगठनों ने जो रास्ता चुना है वह खौफ पैदा करने वाला है। मालेगांव (महाराष्ट्र) और मोडासा (गुजरात) में हुए बम धमाकों को लेकर मुंबई की एंटी टैरेरिस्ट स्क्वैड (एटीएस) द्वारा कतिपय हिंदू संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं की जो धर-पकड़ […]

ईश्वर दर्शन के संकरे रास्ते

जोधपुर के मेहरानगढ़ किले में स्थित चामुंडा माता मंदिर में मची भगदड़ में कोई सवा दो सौ लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है। कोई दो माह पूर्व ही हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नैना देवी मंदिर की सीढ़ियों पर मची श्रद्धालुओं की भगदड़ में लगभग […]

इस बिहारी को तो मुंबई में भी देखा है!

कोसी नदी का पानी अपने किनारों को तोड़ता हुआ लाखों लोगों को अपनी चपेट में नहीं ले लेता तो पता ही नहीं चलता कि देश के नक्शे पर जो बिहार कायम है उसका असली चेहरा कैसा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के साठ सालों के बाद भी देश के गरीब किन हालातों में जिंदा हैं। बाढ़ के […]

आतंकित करती नागरिक उदासीनता

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उजागर होने वाली प्रत्येक कमी के लिए खुफिया तंत्र को दोषी ठहराना एक शगल बन गया है। हमने यह नहीं देखा कि हमारे खुफिया और सुरक्षा तंत्र का पिछले तमाम वर्षों में कितना राजनीतिकरण हो गया है और आम नागरिक के हित जिसकी लाठी उसकी भैंस पर आधारित हो गए हैं। […]

राजनेताओं की प्रतिमाएं और राजनीति के प्रतिमान

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने अपनी उस शानदार प्रतिमा को 1 जून की रात हटवा दिया जिसका कि अनावरण उनके ही हाथों 14 अप्रैल को नवाबों के शहर लखनऊ में आयोजित एक शानदार समारोह में हुआ था और 2 जून को दिन के उजाले में उनकी नई प्रतिमा उसी स्थल पर फिर से स्थापित […]

सरकारें संवादशून्य, नागरिक संवेदनाशून्य!

राजस्थान में वर्तमान में चल रहे आंदोलन ने ‘देश की सरकार’ और ‘देश की जनता’ — दोनों ही को लेकर कुछ अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों की गंभीरता पर गौर किया जा सकता है। सरकार को लेकर सवाल यह है कि कोई भी हुकूमत आंदोलनकारियों के साथ समय रहते बातचीत की पतली […]