हम लोग एक सुनियोजित षड़यंत्र के शिकार हो रहे हैं – श्रवण गर्ग

समाचारी४मीडिया.कॉम ब्यूरो समाचार४मीडिया के मीडिया मंथन में दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने प्रिंट मीडिया में संभावनाओं पर चर्चा करते हुए बताया कि देश के बहुत बड़े हिस्से में अभी भी अखबार नहीं पहुंच पा रहे हैं। देश के किसी हिस्से में मात्र १५ से २० फीसदी लोगों तक ही अखबार पहुंच पा […]

तिलक जैसी पत्रकारिता समय की मांग: श्रवण गर्ग

भास्कर न्यूज नेटवर्क, पुणे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लोकमान्य तिलक की पत्रकारिता की आज के समय में आवश्यकता है। लेकिन वह पत्रकारिता दिखाई नहीं देती। यह बात दैनिक भास्कर के समूह संपादक श्रवण गर्ग ने बुधवार को कही। केसरी-मराठा ट्रस्ट द्वारा गर्ग को पत्रकारिता क्षेत्र में अतुलनीय कार्य करने के लिए लोकमान्य तिलक पत्रकारिता राष्ट्रीय पुरस्कार […]

श्रवण गर्ग को प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय अवार्ड

भास्कर न्यूज/पुणे [dc]दै[/dc]निक भास्कर समाचारपत्र के समूह संपादक और वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग को पत्रकारिता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस वर्ष का प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय अवार्ड प्रदान किया जाएगा। देश के प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सैनानी और केसरी समाचारपत्र के संस्थापक/संपादक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की स्मृति में केसरी-मराठा ट्रस्ट द्वारा […]

कांग्रेस का अन्ना-शक्ति योग

७ अक्टूबर २०११ जन लोकपाल विधेयक पर राजनीतिक दलों को समर्थन के लिए बाध्य करने का अन्ना हजारे का रालेगण सिद्धि घोषणा-पत्र ‘लोकशाही’ को मजबूत करने की दिशा में कितना मददगार सिद्ध होगा, इस पर बहस की जा सकती है। संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक पारित न करवाए जाने की स्थिति में अन्ना द्वारा […]

औरत के बोलने की हिम्मत है 'बोल'

[dc]पाकिस्तान[/dc] की औरत का चेहरा उसकी यातनाएं, बेबसी और एक निहत्थे इंसान के रूप में आज़ादी के लिए उसकी लड़ाई क्या भारत जैसे दुनिया के और मुल्कों से अलग है या फिर सब कुछ मिलता जुलता और एक जैसा ही है और फर्क केवल दीवारों को भेद कर सड़कों पर सुनाई देने वाली चीखों का […]

इसी क्षण की तो प्रतीक्षा थी देश को

२७ अगस्त २०११ विक्रम संवत 2068 के भादो मास के कृष्ण पक्ष की तेरस या फिर इक्कीसवीं शताब्दी के वर्ष 2011 के 27 अगस्त के शनिवार का दिन स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक अप्रतिम अध्याय बनकर एक सौ बीस करोड़ नागरिकों के हृदयस्थल पर अंकित हो गया है। इस अध्याय में लिखा जाएगा कि […]

थैंक्स अन्ना! जादू की छड़ी के लिए

२५ अगस्त २०११ अन्ना जीत गए हैं। वे हजारों लोग जो दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रत्यक्ष उपस्थित हैं और वे करोड़ों अन्य जो देश के अलग-अलग हिस्सों और दुनियाभर में अपनी सांसें थामे हुए पल-पल के घटनाक्रम पर नजर रखे हुए हैं, अब उस अद्भुत क्षण की प्रतीक्षा में हैं जब यह घोषणा भी […]

अनशन पर अन्ना, सेहत सरकार की खराब

२२ अगस्त २०११ अनशन अन्ना हजारे कर रहे हैं, जान सरकार की दांव पर लगी है। कडक़ती धूप में शरीर अपना आंदोलनकारी जला रहे हैं, पसीना वातानुकूलित कमरों में चहलकदमी कर रही सरकार का बह रहा है। सरकार की चिंता आंदोलनकारियों के लगातार तेज होते नारे नहीं, अन्ना की लगातार धीमी पड़ती आवाज है। अब […]

रस्सी बस जली भर है, बल वैसे ही कायम हैं

१८ अगस्त २०११ तिहाड़ जेल से बाहर निकलने के बाद अन्ना हजारे रामलीला मैदान में उमडऩे वाले जन-सैलाब की आसमानी उम्मीदों को कैसे पूरी करने वाले हैं? देश की जनता को उसके समर्थन के लिए धन्यवाद देने के बाद क्या अन्ना यही सूचना देने वाले हैं कि जन लोकपाल की स्थापना को लेकर सरकार के […]

री-इन्वेंटिंग रीजनल जर्नलिज्म

६ अगस्त २०११ झारखंड के युवा कवि अनुज लुगुन की जिस कविता ‘अघोषित उलगुलान’ को इस बार समकालीन युवा कविता का सर्वाधिक प्रतिष्ठित भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार प्राप्त हुआ है उसकी अंतिम आठ पंक्तियां इस प्रकार हैं: लड़ रहे हैं आदिवासी/अघोषित उलगुलान में/कट रहे हैं वृक्ष/माफियाओं की कुल्हाड़ी से और/बढ़ रहे हैं कंक्रीटों के जंगल/दान्डू […]