When Promises Tend to Outrun Performance

[dc]Has[/dc] the Narendra Modi government abysmally failed to deliver anything substantial during the past one year? Has the Prime Minister personally failed to live up to the aspirations and hopes that he himself raised during his euphoria inducing election campaign? [dc]Narendra[/dc] Modi, while on his campaign rampage, may scarcely have imagined, let alone expected, a […]

केजरीवाल जंग

[dc]दिल्ली[/dc] के उपराज्यपाल नजीब जंग और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के बीच अपने अधिकारों को लेकर जिस तरह के टकराव की शुरुआत हुई है वह अब थमने वाली नहीं है। यह चलती रहेगी। केजरीवाल चाहेंगे भी कि वह चलती रहे. इससे उन्हें दिल्ली की जनता को यह समझाने का अवसर मिलेगा कि उनके नेतृत्व वाली आम […]

केजरी को अपना 'आपा' खोने की छूट..?

[dc]अरविंद[/dc] केजरीवाल अगर ‘तानाशाहों’ की तरह से काम करते हुए ‘आम आदमी पार्टी’ को चलाना चाहते हैं और अपने विरोधियों के साथ उसी तरह का व्‍यवहार करना चाहते हैं जैसा कि शनिवार को नई दिल्‍ली में पार्टी के कतिपय प्रमुख संस्‍थापक सदस्‍यों के साथ किया गया तो उन्‍हें ऐसा करने की छूट मिलनी चाहिए। अरविंद […]

दिल्ली को पूरा देश न समझे 'आप'

[dc]अरविंद[/dc] केजरीवाल के बेंगलुरू से स्व स्था होकर वापस दिल्लीक लौटने के साथ ही आम आदमी पार्टी की महत्वाजकांक्षाओं ने अखिल भारतीय स्व्रूप को प्राप्त् करने की अंगड़ाइयां लेना शुरू कर दिया है। इसमें अनुचित भी कुछ नहीं है। एक प्रभावशाली पार्टी के रूप में कांग्रेस पार्टी के समाप्त़प्राय हालातों में पहुंच जाने के बाद […]

कलम की ताकत को जानते थे विनोद मेहता

[dc]एक[/dc] ऐसे वक्त जब संपादकों की जमात लगातार छोटी होती जा रही हो, पत्रकारिता रात-दिन के फर्क के साथ उबासीपूर्ण अंगड़ाइयां ले रही हो, अंधेरे को अंधेरा साबित करना तो दूर उसके बारे में बातचीत करने से भी लोग कतरा रहे हों, केवल अपनी ही शर्तो पर पत्रकारिता करने वाले एक सर्वथा अनौपचारिक पत्रकार-संपादक के […]

अपनी शर्तों पर पत्रकारिता करते थे विनोद मेहता

[dc]विनोद[/dc] मेहता का चले जाना इन मायनों में बड़ा नुकसान है कि अपनी शर्तों पर पत्रकारिता करने वाला उनके कद का संपादक-पत्रकार अब हमारे ‍बीच मौजूद नहीं रहेगा। देश में पत्रकारिता जिस तरह से पल-पल में करवटें बदल रही हैं, विनोद मेहता की कमी का सार्वजनिक रूप से स्मरण करना और उनके जैसा संपादक बनने […]

अरविंद केजरीवाल की चुप्पी उनकी ज़रूरत?

[dc]अरविंद[/dc] केजरीवाल अगर चाहते तो आम आदमी पार्टी के सामने खड़े हुए संकट को टाल सकते थे, उसे सुलझा सकते थे, उसका वक्‍त रहते समाधान कर सकते थे, पर उनका ऐसा नहीं करना उनकी मजबूरी थी और उससे भी ज्‍़यादा उनकी ज़रूरत थी। मजबूरी यह कि अरविंद के बारे में य‍ह लगभग स्‍थापित-सा हो गया […]

दिल्ली की सीख अन्य राज्यों में भी पहुंचेगी

[dc]चुनाव[/dc] दिल्ली में हुए हैं और जश्न पटना, लखनऊ और कोलकाता में मनाये जा रहे हैं. मुख्यमंत्री पद पर अरविंद केजरीवाल काबिज होनेवाले हैं, पर पटना में राज्यपाल के आमंत्रण की प्रतीक्षा नीतीश कुमार कर रहे हैं. दिल्ली चुनाव के परिणामों से उत्पन्न हो रहे इस घटनाक्रम पर कोई आश्चर्य भी व्यक्त नहीं किया जाना […]

मलाला के मुल्क में मासूमों का कत्ल

[dc]शांति[/dc] का नोबेल पुरस्कार ग्रहण करते हुए मलाला यूसुफजई जब अपने दिल के कहीं बहुत भीतर से कह रही थीं कि बच्चों के हाथों में बंदूकें देना आसान है पर किताबें देना मुश्किल, तब पाकिस्तान की स्वात घाटी की इस बहादुर बालिका को अंदाजा नहीं रहा होगा कि कुछ ही दिनों में समूची दुनिया को […]

हमारी भूमिका कहां से शुरू कहां खत्म?

[dc]हरियाणा[/dc] रोडवेज की चलती हुई बस में जब पूजा और आरती नाम की दो बहनें अपने आपको ‘विवादास्पद’ छेड़छाड़ से बचाने के लिए संघर्ष कर रही थीं, तब बस में सवार दूसरे लोग मूकदर्शक बने हुए थे। यकीन किया जाए तो दोनों बहनों के नजदीक बैठी एक महिला ने हिम्मत करके छेड़छाड़ करने वालों का […]