इस बिहारी को तो मुंबई में भी देखा है!

कोसी नदी का पानी अपने किनारों को तोड़ता हुआ लाखों लोगों को अपनी चपेट में नहीं ले लेता तो पता ही नहीं चलता कि देश के नक्शे पर जो बिहार कायम है उसका असली चेहरा कैसा है। स्वतंत्रता प्राप्ति के साठ सालों के बाद भी देश के गरीब किन हालातों में जिंदा हैं। बाढ़ के […]

आतंकित करती नागरिक उदासीनता

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उजागर होने वाली प्रत्येक कमी के लिए खुफिया तंत्र को दोषी ठहराना एक शगल बन गया है। हमने यह नहीं देखा कि हमारे खुफिया और सुरक्षा तंत्र का पिछले तमाम वर्षों में कितना राजनीतिकरण हो गया है और आम नागरिक के हित जिसकी लाठी उसकी भैंस पर आधारित हो गए हैं। […]

राजनेताओं की प्रतिमाएं और राजनीति के प्रतिमान

उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती ने अपनी उस शानदार प्रतिमा को 1 जून की रात हटवा दिया जिसका कि अनावरण उनके ही हाथों 14 अप्रैल को नवाबों के शहर लखनऊ में आयोजित एक शानदार समारोह में हुआ था और 2 जून को दिन के उजाले में उनकी नई प्रतिमा उसी स्थल पर फिर से स्थापित […]

सरकारें संवादशून्य, नागरिक संवेदनाशून्य!

राजस्थान में वर्तमान में चल रहे आंदोलन ने ‘देश की सरकार’ और ‘देश की जनता’ — दोनों ही को लेकर कुछ अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। इन सवालों की गंभीरता पर गौर किया जा सकता है। सरकार को लेकर सवाल यह है कि कोई भी हुकूमत आंदोलनकारियों के साथ समय रहते बातचीत की पतली […]

चापलूसी के चाचा चौधरी और कांग्रेस की अमरकथा

राजीव गांधी राजनीति में पैर भी नहीं रखना चाहते थे। वे एक नितांत ही प्रायवेट और अगल किस्म के इंसान थे। उनका संपूर्ण व्यक्तित्व अद्भुत और आकर्षक था। पर भाई संजय गांधी की असामयिक मौत के कारण श्रीमती इंदिरा गांधी जब अकेली पड़ गईं तो राजीव ने न सिर्फ राजनीति में प्रवेश किया उसके साथ […]

क्यों नहीं आता गुस्सा और फूटते हैं आंसू

श्याम बेनेगल की स्मरणीय कृति ‘अंकुर’ के अंतिम दृश्य में समाज के सबसे शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाला बच्च शोषक जमींदार की हवेली पर पत्थर उछालता है और इसी के साथ फिल्म का अंत हो जाता है। याददाश्त बहुत खराब हो तब भी अंकुर को फूटे कोई तीस-पैंतीस साल से ज्यादा का वक्त हो […]

बाजार ही तय करेगा क्रिकेट और खिलाड़ियों का भविष्य

देश में इन दिनों बहस चल रही है कि विश्व कप में हारकर लौटी टीम के साथ किस तरह का सुलूक किया जाए। इस सवाल को लेकर खुला मतदान चल रहा है कि राहुल द्रविड़ को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाए रखा जाए या नहीं, ग्रेग चैपल की कोच के रूप में सेवाएं हमें […]