‘दंभ’ के दायरों से बाहर आए कांग्रेस

जमाने की हिंदी फिल्मों की स्क्रिप्ट का यह एक अहम दृश्य होता था कि हीरो या हीरोइन की बूढ़ी मां को किसी ‘ट्रेजेडी’ के बाद इतना गहरा सदमा लगता है कि वह जड़ हो जाती है। उसका बोलना-चालना या खाना-पीना बंद हो जाता है। फिल्म की पटकथा में तब एक नकली किस्म का डॉक्टर प्रकट […]

गांधी की याद आने के मायने

ऐसे राष्ट्र के जीवन में, जिसने विकास की उपलब्धियों से साक्षात्कार कर लिया है और जो संपन्‍नता के रास्तों पर दौड़ लगाते हुए विकसित व्यवस्थाओं की जमात में अपने आपको शामिल देखने के लिए बेचैन हो उठा है, आने वाला समय परीक्षा की घड़ी पेश कर सकता है। बहुत मुमकिन है विकास की जद्दोजहद में […]

देश और भाजपा हित में अच्छे नतीजे

के नतीजों पर प्राप्त हो रही प्रतिक्रियाओं का रुख लगभग सही दिशा में ही है। योगी आदित्यनाथ के तेवर ठंडे पड़ गए हैं और उद्धव ठाकरे के चेहरे पर मुस्कराहट है। पर, प्राप्त परिणामों से इस आशय के कयास भी नहीं लगाए जाने चाहिए कि सरकार के सौ दिन पूरे होते ही विपक्ष के अच्छे […]