साजिद, सयाजी और शहर

साजिद धनानी ने मौका ही नहीं दिया कि कोई उन्हें कभी इत्मिनान से बता सके कि पिछले कोई बीस सालों में इंदौर को उसकी मूल आत्मा के साथ ही एक आधुनिक शहर में तब्दील करने में उनकी कितनी अहम भूमिका रही है। साजिद वास्तव में एक लगातार बोलते रहने वाली जीवंत होटल के एक चुपचाप रहने वाले मालिक थे। वे अपनी ही सजाई पार्टियों और महफिलों में भी कब चुपचाप से आते और कब गायब हो जाते पता ही नहीं चल पाता था। देखते ही देखते उन्होंने एक अजनबी शहर को अपनी आत्मा बना लिया था और अपने चाहने वालों की एक ऐसी जमात खड़ी कर ली जो अब परेशान है कि साजिद के बिना सयाजी और उसकी सातवीं मंजिल से शहर की रोशनी किस तरह की दिखाई देगी। साजिद ने जब वर्ष 1994 में सयाजी क्लब की शुरुआत की तब पंडित भीमसेन जोशी की आवाज को अपना मेहमान बनाया था और जब दो साल बाद 1996 में होटल को शुरू किया तो धक्-धक् गर्ल माधुरी दीक्षित ने सयाजी की मेहमाननवाजी कुबूल की। यह शुरुआत थी उस जमाने में शहर से दूर गिने जाने वाले एक इलाके का सन्नााटा तोड़कर एक जगमगाते हुए नए इंदौर को आबाद करने की। आने वाले बरसों में वह सन्नााटा ऐसा टूटा कि कभी सुनसान रहने वाला समूचा इलाका शहर की नई धड़कन बन गया और सयाजी उसका केंद्रबिंदु। समय के साथ सयाजी का सबकुछ बदलता गया। वह आधुनिक से आधुनिकतम होता गया। पर जो चीज अंत तक नहीं बदली वह थी साजिद धनानी एक इंसान और उनका छोटा-सा ऑफिस। हरेक के लिए, हर वक्त, हर तकलीफ में मदद करने वाली शख्सियत का नाम ही साजिद था। साजिद के घर पर सोमवार को जमा सैंकडों लोगों की भीड़ को देखकर इसीलिए बता पाना मुश्किल था कि जो शख्स बच्चों जैसे भोलेपन के साथ अब नजर नहीं आने वाला है उसकी जाति क्या थी या वह किस धर्म का था। साजिद अब एक कभी भी भरी न जा सकने वाली ‘कमी” बन गए हैं। सयाजी को अब उनकी उपस्थिति के बिना ही रहने की कोशिश भी करनी है और साथ ही शहर को वह सब कुछ भी देते रहना है जो साजिद देना चाहते थे।

Tribute – In Memorium: Sajid R. Dhanani, Managing Director, Sayaji Hotels Limited – prematurely passed away at Indore.