राहुल की कांग्रेस और वरुण की भाजपा!

राहुल गांधी में इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे अपना सहारनपुर दौरा रद्द कर देते। उनमें यह भी दम नहीं था कि कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार इमरान मसूद ने नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो कुछ भी अप्रिय कहा उसकी वे सार्वजनिक रूप से भर्त्सना कर देते। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने तो इमरान मसूद का बचाव करते हुए पूरे मामले को यह कहते हुए दफन कर दिया कि हमें किसी के भी लिए ‘कठोर’ शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। राहुल गांधी जानते थे कि सहारनपुर संसदीय क्षेत्र में कोई एक तिहाई मतदाता मुस्लिम हैं। वे यह भी जानते हैं कि समूचे उत्तरप्रदेश में लगभग बीस प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं जो कांग्रेस की सीटों का गणित बना-बिगाड़ सकते हैं। इस समय एक-एक सीट के लिए मोहताज राहुल गांधी अगर सहारनपुर नहीं जाते और नरेंद्र मोदी के टुकड़े-टुकड़े कर देने की बात करने वाले इमरान मसूद को पार्टी से अलग करने की हिम्मत दिखा देते तो फिर उसके परिणामों का अंदाजा लगाना भी उनके लिए कठिन नहीं था। राहुल गांधी की इसी मजबूरी के चलते ही जेल भेजे जाने के दौरान भी इमरान मसूद को अपने कहे के लिए कोई पश्चाताप नहीं था। उसने साफ कहा कि वह न तो मोदी से या भाजपा से कोई माफी मांगेगा। वह सौ मर्तबा भी जेल जाने को तैयार है। उत्तरप्रदेश कांग्रेस की धर्मनिरपेक्ष नेता रीता बहुगुणा दावा करती हैं कि इमरान मसूद एक जीतने वाला उम्मीदवार है। कांग्रेस को इस समय जीत दर्ज कराने वालों की ही दरकार है। निश्चित ही इमरान चुनाव जीतने के बाद संसद में राहुल गांधी से हाथ मिलाने के साथ-साथ नरेंद्र मोदी से भी आंखें मिलाना चाहेगा। इमरान मसूद अब कांग्रेस पार्टी का नया हीरो है। कांग्रेस से अगर ईमानदारी से पूछताछ की जाए तो उसे इमरान मसूद जैसी शख्सियत की इस समय सख्त जरूरत थी जो उसके ‘मौत के सौदागर’ वाले नारे को और भी आक्रामक तरीके से आगे ले जा सके।

र पहले यह दिखाया जा रहा था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी तो मतदाताओं का धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करना चाह रही है पर राहुल गांधी की नई कांग्रेस अब एक असली धर्म निरपेक्ष और पारदर्शी चेहरे के साथ चुनावों में उतरना चाहती है। पर हो यह रहा है कि कांग्रेस और ज्यादा नकली साबित होकर उभर रही है। मतदाताओं का जो ध्रुवीकरण कांग्रेस करना मांग रही है वह और भी ज्यादा खतरनाक साबित होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और राहुल के चचेरे भाई वरुण गांधी ने भी जब कुछ समय पहले लगभग इमरान मसूद जैसी ही भाषा का इस्तेमाल किया था तब देश को काफी कंपकंपी छूटी थी। भारतीय जनता पार्टी ने तब बचाव में पूरी तरह से सन्नाटा ओढ़ लिया था। श्रीराम सेना के प्रमोद मुतालिक को पार्टी में शामिल करने का प्रयास भी भाजपा के कट्टरपंथी चेहरे को ही उजागर करने वाला था। पर पार्टी ने समय रहते अपनी गलती सुधार ली।

ण्णा हजारे के आंदोलन और ‘आम आदमी पार्टी’ के उदय के बाद देश को उम्मीदें बंधी थी कि नई लोकसभा का चेहरा अब शालीन, ईमानदार और पारदर्शी चरित्र वाले प्रतिनिधियों की उपस्थिति से मिलकर बनेगा पर वैसा होता नजर नहीं आ रहा। लोकसभा में कांग्रेस की बेंचों पर नंदन नीलकेणि के साथ अब इमरान मसूद बैठने वाले हैं। ऐसा ही कुछ नजारा भाजपा में भी दिखने वाला है। राजनीति का तालीबानीकरण भी किया जा रहा है और जनता से भारी संख्या में मतदान में भाग लेने की अपीलें की जा रही है।