मजमा न लगे तो मीडिया खराब!

मीडिया को अरविंद केजरीवाल के प्रति अपना गुस्सा थूक देना चाहिए – ऐसी जगह पर, जो झाडू की पहुंच के बाहर हो। मान लेना चाहिए कि केजरीवाल सबकुछ समझ-बूझकर कर रहे हैं। यह उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। केजरीवाल जानते हैं कि वे मीडिया को जितना ज्यादा लतियाएंगे, वे मीडिया वालों की उतनी ही जरूरत बने रहेंगे। ऐसा वे पहली बार नहीं कर रहे हैं। उनकी मानें तो पिछले तीन सालों में मीडिया कई बार बिक चुका है। वे मीडिया की खबरों के लिए भूख और आम जनता की जरूरत को अब अच्छे-से समझ गए हैं। ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ आंदोलन के दौरान जब-जब भीड़ कम हुई, उसका सारा दोष मीडिया के सिर मढ़ा गया। अब कहा जा रहा है कि मीडिया का एक वर्ग मोदी का एजेंडा चला रहा है। केजरीवाल ने कथित तौर पर धमकी दी है कि अगर उनकी सरकार सत्ता में आई तो वे समूचे षड्यंत्र के खिलाफ जांच बैठाकर दोषी लोगों और मीडियाकर्मियों को जेल में डलवा देंगे। मीडिया पर अंकुश लगाने और मीडियाकर्मियों को जेल में डालने का दु:साहस अंग्रेजों के बाद आपातकाल के दौरान केवल श्रीमती इंदिरा गांधी की कांग्रेस सरकार ने किया था। कांग्रेस की हुकूमत इस समय डूब के कगार पर है और मीडिया में उनके शासनकाल की जमकर आलोचना भी की जा रही है, पर न तो मनमोहन सिंह और न ही सोनिया-राहुल गांधी ने कभी उस तरह के आरोप लगाए, जैसे कि केजरीवाल लगा रहे हैं।

केजरीवाल द्वारा मीडिया को बेईमान साबित करने के पीछे केवल दो कारण हो सकते हैं :
पहले कारण का संबंध केजरीवाल के इस अतिरंजित अहंकार के साथ हो सकता है कि वे अब शिखर पर पहुंच गए हैं और कुछ भी कहने के लिए स्वतंत्र हैं। देश की जनता सड़कों के दोनों ओर खड़ी होकर उनके सम्मान में हाथ हिला रही है, स्टेशनों पर मेटल डिटेक्टर तोड़ रही है, उनकी एक झलक पाने को बेताब है और मीडिया है कि उन्हें सत्ता की प्रतिस्पर्धा में गिन ही नहीं रहा है। सिर्फ मोदी का नाम जप रहा है। मीडिया को भी मोदी के खिलाफ उसी तरह से प्रचार में जुट जाना चाहिए, जैसा कि वे कर रहे हैं। केजरीवाल की नजरों में मीडिया ऐसा इसलिए नहीं कर रहा है, क्योंकि उसका एक वर्ग बिक गया है। आम आदमी पार्टी को यकीन है कि लोकसभा चुनावों में वह बड़ा चमत्कार करने वाली है। ओपिनियन पोल्स चूंकि बिक चुके हैं, इसलिए आम आदमी पार्टी की चुनावी संभावनाओं को कमतर करके दिखा रहे हैं। केजरीवाल को भरोसा है कि जिस तरह से दिल्ली विधानसभा के चुनावों में आम आदमी पार्टी ने चमत्कार किया, वैसा ही लोकसभा चुनावों में भी होगा। चूंकि देश की जनता उनके साथ है, मीडिया की मजबूरी बनी रहेगी कि वह अपनी आलोचना झेलकर भी उन्हें और ‘आप’ को खबरों में बनाए रखे। मीडिया के प्रति केजरीवाल की नाराजगी का दूसरा कारण केवल यही हो सकता है कि प्रतिकूल चुनाव परिणाम आने की स्थिति में सबकुछ मीडिया पर ढोल देने की भूमिका वे अभी से तैयार कर लेना चाहते हैं।

दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि ईमानदार जनता के कंधों पर सवार होकर खड़े किए एक शानदार आंदोलन का इस्तेमाल अरविंद और अण्णा दोनों ही अपने-अपने कारणों से केवल भीड़ जमा करने के लिए करना चाहते हैं और उसके लिए मदद मीडिया से चाहते हैं।