नीतीश और केजरीवाल की नजदीकियों से बने नए समीकरण

नीतीश कुमार और अरविंद केजरीवाल के बीच पिछले कई दिनों से लगातार बढ़ती जा रही नजदीकियों के पीछे छुपे मंतव्यों पर से पर्दा उठा दिया गया है। बिहार में होने जा रहे प्रतिष्ठापूर्ण विधानसभा चुनावों को लेकर केजरीवाल ने नीतीश कुमार के पक्ष में अपने समर्थन की खुली घोषणा कर दी है। केजरीवाल इस सिलसिले में बिहार का चुनावी दौरा करने के लिए भी तैयार हो गए हैं। दिल्ली में रहने वाली जिस बिहारी आबादी ने आम आदमी पार्टी का विधानसभा चुनावों में समर्थन किया था, उसी से अब केजरीवाल ने नीतीश कुमार की सरकार को सत्ता में वापस लाने का आव्हान किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बिहार के लिए स्पेशल पैकेज की घोषणा किए जाने के तत्काल बाद नीतीश-केजरीवाल के गठबंधन का घटनाक्रम बताता है कि बिहार के चुनाव देश की राजनीति में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले हैं। बिहार को लेकर इस तरह का कोई घटनाक्रम शीघ्र ही प्रकट हो सकता है उसी समय स्पष्ठ हो गया था जब घोषणा की गई कि केजरीवाल सरकार 19 अगस्त को दिल्ली में एक समारोह आयोजित कर रही है, जिसे ‘बिहार सम्मान सम्मेलन का नाम दिया गया है।

सम्मेलन का उद्देश्य बिहार और पूर्वांचल मूल के उन लोगों को सम्मानित करना बताया गया जो केंद्र की राजधानी में निवास करते हुए दिल्ली राज्य के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं। यह घोषणा भी की गई कि नीतीश कुमार समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। इतना ही नहीं, नीतीश कुमार की ही उपस्थिति में केजरीवाल दिल्ली में अगले महीने एक और समारोह करने वाले हैं। नीतीश और केजरीवाल के बीच इसके पूर्व मुलाकात 14 जुलाई को हुई थी, जब बिहार के मुख्यमंत्री स्वयं चलकर दिल्ली सरकार के सचिवालय पहुंचे थे। दोनों नेताओं के बीच अब तक पांच मुलाकातें हो चुकी हैं, ऐसा बताया जाता है।

बिहार में हाल ही हुए विधान परिषद के चुनाव परिणामों ने अगर नीतीश कुमार के आत्मविश्वास को हिलाकर रख दिया हो तो कोई आश्चर्य की बात नहीं। बिहार के मुख्यमंत्री का केजरीवाल के समर्थन के प्रति इतना भरोसा व्यक्त करना बताता है कि विधान परिषद के विपरीत परिणामों के बाद नीतीश अपने महा गठबंधन के प्रमुख सहयोगी लालू यादव की ताकत पर एक सीमा से ज्यादा भरोसा नहीं कर सकते।

दूसरे यह भी कि नीतीश और लालू कितनी दूरी तक साथ-साथ चल सकेंगे इसे लेकर संशय कायम है। साथ ही यह भी कि आम आदमी पार्टी बिहार में विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही है। नीतीश और केजरीवाल के बीच एक चीज जो कॉमन है, वह यह कि दोनों ही नेताओं की राजनीतिक आकांक्षाएं राष्ट्रीय स्तर की हैं और असीमित भी। दोनों ही नेताओं के विरोध के निशाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। इसी कारण दिल्ली सम्मेलन का भरपूर उपयोग भी मोदी पर आक्रमण करने के लिए किया गया और बिहार के लिए घोषित पैकेज को राज्य के मतदाताओं को खरीदने का उपक्रम निरूपित किया गया।

यह आरोप भी लगाया गया क़ि प्रधानमंत्री बिहार के मतदाताओं का अपमान कर रहे हैं। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा और दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग का दोनों ही नेताओं ने एकसाथ समर्थन किया। केजरीवाल के साथ नीतीश कुमार द्वारा बनाए जा रहे समीकरणों पर लालू प्रसाद यादव और उनके समर्थकों की और से कोई प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है। बहुत संभव है कि नीतीश कुमार के पटना वापस पहुंचने और लालू यादव से उनकी मुलाकात के बाद ही महा गठबंधन की स्थिति स्पष्ट हो। इतना तो तय है कि चुनाव की तारीखों की घोषणा के पहले ही बिहार का चुनावी परिदृश्य काफी दिलचस्प बन गया है।